Sachwala Ji Ka Parichay, Ex Mushlim Adda Sachwala - Kuran Expart, कौन है सचवाला कुरान एक्सपर्ट सच के लिए गूंजती आवाज।
Sachwala: जी की आवाज में अफसोस और दर्द साफ झलकता है।
- Sachwala: मुझे मेरे बीवी-बच्चों ने अलग कर दिया। मेरे पाँच भाई मुझसे दूर हो गए। मोहल्ले में रहना-जीना मुश्किल हो गया। मैंने किसी का माल नहीं खाया। किसी का दिल नहीं दुखाया। किसी को कत्ल नहीं किया। किसी को धोखा नहीं दिया। कोई बताए कि मेरा कुसूर क्या है? मैंने कौन सा गुनाह किया है?
Azad ground ex-Muslim Sachwala
Sachwala Youtube: यूट्यूब पर पिछले कुछ महीनों से एक गौरतलब आवाज गूँज रही है। सच को तलाश करती हुई एक सच्ची आवाज। उसका चेहरा सामने नहीं है, लेकिन जब वह आवाज गूँजती है तो स्क्रीन पर उसकी जगह पर लिखा आता है- सचवाला। Sachwala.
एक भारतीय शख्स Sachwala जो अब Ex Mushlim है, जिसने 57 साल तक मुस्लिम परिवेश में रहने के बाद एक दिन खुद को अपने सवालों के साथ अकेला पाया। उसे कोई जवाब नहीं मिले और वह इस्लाम से बाहर आ गया। दो या डेढ़ साल पहले उनकी एक नई यात्रा शुरू हो चुका है। Sachwala कुरान kuran के Text (कथन) पर ही अधिक वार्ता करते हैं। इनका कहना है की mushlim आम मुस्लिम लोग kuran कुरान को अरबी में रट लेते हैं इनको उसका मतलब (अर्थ) पता नहीं रहता है। और जिनको उक्त कथन का मतलब पता होता है वे लोग अर्थ का अनर्थ करके बातो को घोल घोल घुमाने लीपापोती करने मै लग जाते हैं। इसलिए सचवाला Sachawala का उद्देश्य है की मुस्लिम को कुरान के टेक्स्ट का मतलब सही सही से जाने की क्या कहा जा रहा है।
Sachwala साचवाला फर्राटेदार अरबी में बात करते हैं। कुरान के 114 सूरे की हर आयत अपने सटीक संदर्भ के साथ उन्हें कंठस्थ है। हदीसों से किसी भी आलिम से बेहतर वाकिफ हैं। हज और उमरा कई दफा कर चुके हैं। इस्लाम की हर हरकत को उन्होंने एक ईमानदार जिज्ञासु की तरह देखा और समझा है। उम्र का एक बड़ा हिस्सा दीन के पक्के मुस्लिम की तरह गुजारने के बाद उन्हें तमाम तरह के सवालों ने घेर लिया, जिनके जवाब कहीं नहीं मिले।
न किताब में, न किताबों के जानकारों के पास। वहाँ थे सिर्फ दावे और यकीन, वो भी बिना सबूत के। उनके शब्द कथन इस प्रकार से हैं। Sachwala
friendly exmuslim Sachwala
Sachwala: मैंने पाया कि कुरान पूरी तरह से एक अरब आइडियोलॉजी है। यह एक आक्रामक और सशस्त्र सियासी विचारधारा है। मैं इस अरब विचारधारा को मानने से इंकार करता हूँ। मैं जानना चाहता हूँ कि इन दावों की हकीकत क्या है, लेकिन किसी के पास जवाब नहीं हैं, दलीलें नहीं हैं, अंधे यकीन हैं। मैं इस्लाम को छोड़ चुका हूँ।
Sachwala Truth of islam.
Sachwala सचवाला जी इन दिनों यूट्यूब चैनलों पर गूँजती एक बेहद मकबूल आवाज हैं। हजारों लोग उनसे उनकी जिंदगी के बारे में पूछ रहे हैं। उनके गैर-मुस्लिम श्रोताओं की दिलचस्पी यह जानने में है कि इस्लाम से बाहर उनकी जिंदगी कैसी कट रही है। जो दीन के पक्के मुस्लिम हैं, वे उन्हें समझाइश या लानतें दे रहे हैं, क्योंकि इस्लाम की कड़क बंदिशों में किसी को बाहर जाने की इजाजत नहीं है। अगर किसी ने इस्लाम को छोड़ा तो वह मुलहिद या मुरतद है, जिसकी सजा तय है। जो मुस्लिम घुटन महसूस करते हैं, उनके लिए Sachwala सचवाला एक उम्मीद जगाने वाली आवाज बन गए हैं।
Washim Rijvi वसीम रिजवी ने Kuran कुरान की जिन आयतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, Sachwala सचवाला उन और उन जैसी तमाम आयतों को अरबी में पढ़कर शुद्ध हिंदी में उनके अर्थ और व्याख्या करते हैं। वे फरमाते हैं।
Islam Ka Sach mulhid Sachwala
Sachwala: हजरत मोहम्मद के ढाई सौ साल बाद आयतों को संकलित किया गया। वह कोई अल्लाह की लिखी हुई किताब नहीं है। हदीसें भी बहुत बाद में लिखी गई हैं। उनमें लिखने वालों की मनमानियाँ स्पष्ट नजर आती हैं। लेकिन आँख बंद करके मनवाने पर जोर रहा है, खुली आँखों से सच का सामना करने की इजाज़त नहीं रही। मैं जाने बगैर मानने से इंकार करता हूँ।
Sachwala सचवाला जी के तीखे प्रश्न इस प्रकार से है।
प्रश्न। Kuran कुरान में कहाँ लिखा है कि वह अल्लाह ने मोहम्मद पर उतारा है? बगैर दलील के लोग मान लेते हैं। इतनी बड़ी बात खुद जानने की कोशिश नहीं की। जो बात कुरान में है ही नहीं, वह लोग मनवाने पर उतारू रहते हैं। हम दस रुपए की चीज बाज़ार से खरीदने के पहले देख-परखते हैं। लोग इतनी बड़ी बात बिना जाने-माने बैठे हैं। मैंने 57 साल इसकी टोह में लगा रहा, जब जवाब नहीं मिला तो मैं बाहर आ गया। जानने की कोशिश करना क्या जुर्म है?
deen ki dawat Sachwala.
एक बहस में हैदराबाद का एक आलिम उन्हें सिर्फ इस वजह से ज़ालिमों में शरीक ठहराता है, क्योंकि वे इस्लाम से बाहर हो गए। यानी, जो इस्लाम को नहीं मानता, वह ज़ालिम है। वह आलिम पूछता है कि आप मुस्लिम हैं या मुरतद हो गए हैं, काफिर हो गए हैं? वह फैसला सुनाता है कि ‘आलमे-इस्लाम आपको मुरतद ही मानेगा। आपके पास अभी भी मौका है कि आप इस्लाम पर यकीन ले आएँ या क़ाफ़िर रहें।
Sachwala सचवाला जी इस प्रकार जवाब देते हैं।
मैं अब एक इंसान हूँ। मुझ पर यह ठप्पा लगाने का हक दिया किसने इस्लाम को? मैं हाफ़िज़े-क़ुरान हूँ। तफ़सीरें पढ़ चुका हूँ। क्लासिक अरबी पढ़ी। चालीस साल तक पढ़ता रहा। बारह साल से गौर किया। मुझे कहीं बुनियाद नज़र नहीं आया। वह एक आधी-अधूरी बेबुनियाद विचारधारा है, जिसने दुनिया को जीते-जी ज़हन्नुम बनाकर रखा है।
Sachwala सचवाला मानते हैं कि क़ुरान और हदीसों के ढेर मिलकर भी उस एक विचार को मुकम्मल बुनियाद देने में नाकाम रहे हैं, जिसके दावे जोर-शोर से किए गए। लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ अरबी में रटे बैठे हैं। न उन्हें उनके अर्थ मालूम, न ही कोई संदर्भ और सवाल उठाना तो गुनाह ही है। इसलिए मानने और मनवाने पर जोर है, जानने और पूछने पर नहीं।
यह दलील गौरतलब है कि जब अल्लाह ने रास्ता बता दिया, जिसमें एक गलत दूसरा सही है तो उसके आगे उसका क्या काम? एक बार जब यह बता दिया गया है कि यह हिदायत का रास्ता, यह गुमराही का रास्ता। अब यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वह किस रास्ते पर चले। अल्लाह का दखल हर बात में क्यों? अल्लाह क्यों मुहर लगाता है दिलों पर? इस्लाम की दूसरी रवायतों को लेकर भी उनके पास सवालों की कमी नहीं है। औरत को मिल्कियत कहा गया, सूरे-निशा में तीन जगह लिखा- मिल्के अमीन।
Sachwala सचवाला अकेले नहीं हैं, जो लंबी जिंदगी इस्लाम में गुजारने के बाद बाहर आकर दुनिया से रूबरू हैं। इस्लाम की नजर में वे मुरतद हैं। इसकी सजा मौत है। वे वाजिबुल-कत्ल हैं। इसलिए अपनी पहचान छिपाकर अपनी बात दुनिया के सामने रखना उनकी मजबूरी है।
Ex Mushlim Youtubers.
Sachwala सचवाला उनकी एक छिपी हुई पहचान है। कोई Aazad Ground आजाद ग्राउंड तो कोई Kohram कोहराम के नाम से यूट्यूब Youtube पर सारी दुनिया में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। लेकिन कई हिम्मतवर चेहरे अपनी पहचान के साथ खुलकर सामने हैं।
• बंगाल मूल की Sarah Khan सारा खान काली दासी Kalidashi के नाम से अपने मशहूर यूट्यूब चैनल पर सक्रिय हैं।
• पंडित महेंद्रपाल आर्य Pandit Mahendra Pal Aarya भी एक पकी हुई उम्र में इस्लाम से बाहर आकर आर्य समाजी हो गए।
• अफगानिस्तान मूल की डॉ फ़ौजिया रऊफ़ Dr. Fauziya Rauf.
• अमीना सरदार Amina Sardar इस्लाम पर खुलकर आगबबूला हैं।
Pakistan पाकिस्तान मूल के Harrish Sultan हारिस सुलतान, Galib kamal गालिब कमाल और महलीज सरकारी Mahlij Sarkari, Ex Muslim Spartacus Youtube, स्पार्टाकस, के दुनियाभर में लोकप्रिय चैनलों के फ़ॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें मुस्लिम देशों के ही पढ़े-लिखे नौजवान युवक-युवतियों की तादाद सबसे ज्यादा है।
वे इस्लामी दुनिया की हर हरकत पर अपनी राय पेश कर रहे हैं। वे राजनीतिक नेतृत्व की नीयत पर सवाल कर रहे हैं और सबसे ज्यादा मुल्ले, मौलवी, मस्जिद और मदरसों के खतरनाक फैलाव की हकीकतें उजागर कर रहे हैं। किताबी दावों और ब्यौरों के परखच्चे उड़ रहे हैं। ये सब लोग एक-दूसरे के चैनलों पर भी सवालों के जवाब दे रहे हैं।
Ex Mushlim vs KattarPanthi.
इस्लाम के लिए इंटरनेट तेज हवा के एक ऐसे झोंके की तरह आया है, जिसने सदियों से बंद खिड़की-दरवाजे खोल दिए हैं। Ex Mushlim एक्स मुस्लिमों की यह तेज़ रफ्तार लहर पिछले दो सालों में सामने आई है, जिनमें कई नए नाम तो पिछले 6-8 महीनों में जुड़े हैं। मौत के फतवे झेलने वाले सलमान रुश्दी की शैतानी आयतें अब बच्चों की दुनिया की बातें हैं।
इंटरनेट के चप्पे-चप्पे पर रुश्दी के ये नए युवा और आक्रामक अवतार बेखौफ होकर चुनौती पेश कर रहे हैं। वे मानने के लिए राजी नहीं हैं। वे जानना चाहते हैं। उनके पास सवाल हैं और दलीलें हैं। आलमे-इस्लाम का पहली बार अपने ही भीतर से उपजी ऐसी ताकतों से सामना हो रहा है, जो उसकी कमजोर बुनियाद को हर तरफ से हिलाने में लगे हैं।
इंटरनेट की इस ताकत ने मुख्यधारा के प्रिंट और टेलीविजन मीडिया के सामने वजूद का संकट खड़ा दिया है, जो कट्टरपंथी ताकतों के डर और भारत के दिव्यांग सेक्युलरिज्म के माहौल में इस्लाम की इस बढ़ती बेचैनी से बेखबर है।
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